शिक्षा से वंचित बच्चों को विद्यालय में लाने की मुहीम

शिक्षा से वंचित बच्चों को विद्यालय में लाने की मुहीम

सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य —उत्तर प्रदेश— में बच्चों को चिन्हित कर उन्हें विद्यालय में नामांकित करना और उनका ठहराव एक बड़ी चुनौती है। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग, सामाजिक संस्था आदि लगातार इस दिशा में प्रयासरत हैं परंतु अनेकों सामाजिक और राजनैतिक कारणों से बड़ी संख्या में प्रदेश में बच्चे स्कूल से बाहर हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चों के आंकड़े हमेशा विवाद में रहें है। वर्ष 2018-19 में राज्य सरकार के द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार 6-14 वर्ष तक के 27,695 बच्चें विद्यालय से बाहर थे। उसी सत्र में स्टेट कलेक्टिव फॉर राइट टू एडुकेशन (स्कोर) द्वारा किये गए सैंपल सर्वे के अनुसार प्रदेश में तकरीबन 35 लाख बच्चों के विद्यालय से बाहर होने का अनुमान लगाया गया था। इन बच्चों में दलित, मुस्लिम और बाल मजदूर की संख्या काफी थी। 

मार्च 2020 में कोरोना के संक्रमण के कारण देश व्यापी लॉक डाउन किया गया। तब से अगस्त 2021 तक स्कूल बंद रहें हैं। इस दौरान जहां एक ओर समाज में डिजिटल डिवाइड उजागर हुआ वहीं अनेकों बच्चे प्रवासी मजदूरों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से अपने गाँव और मजरे में वापिस लौटें। एक तरफ सरकारी विद्यालयों में नामांकित बच्चे सरकार द्वारा डिजिटल शिक्षा पर ज़ोर देने के बावजूद आधुनिक उपकरणों, ऐन्ड्रोइड मोबाइल फोन, इंटरनेट आदि के अभाव में शिक्षा से बंचीत रह गये। लॉक डाउन का बुरा प्रभाव सबों पर पड़ा परंतु गरीब, अभिवंचित खास कर दलित, मुस्लिम, बाल मज़दूर, बालिकाओं विशेष रूप से प्रभावित हुये। ऐसे में जबकि एक वर्ष तक बच्चों की पढ़ाई छूट गयी, शिक्षण कार्य लंबे समय तक प्रभावित हुआ, बच्चों के विद्यालय से ड्रॉप आउट होने की संभावना बढ़ गयी है।  

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शारदा- स्कूल हर दिन आयें अभियान के तहत 6-14 वर्ष के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को जो किसी भी कारणवश या तो कभी विद्यालय नहीं जा सके या दाखिले के पश्चात विद्यालय से बाहर हो गये ऐसे बच्चों को चिन्हित कर स्कूल में नामांकित करने की  मुहीम चलायी जा रही है। बच्चों को विद्यालय मे लाने की चुनौती में सिर्फ शिक्षा विभाग हीं नहीं अपितु सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, ग्राम पंचायतों और अन्य घटकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है जिसके लिए सबों को साझा प्रयास करने की जरूरत है। 

ऑक्सफैम इंडिया नें 6 से 14 वर्ष तक के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिन्हाँकित कर उनका नामांकन और ठहराव विद्यालय में सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग के साथ मिल कर कार्य करने की शुरुवात की है। हालांकि विद्यायालय से बाहर बच्चों की पहचान करना और उनके माता-पिता और स्वयं बच्चों को समझा बुझा कर स्कूल में पुनः लाना एक कठिन चुनौती है। परंतु शिक्षकों, स्वयं सेवी संस्थाओं, विद्यालय प्रबंध समिति और अभिभावकों के साझे प्रयास से यह संभव है। इस दिशा में ऑक्सफैम ने प्रतापगढ़, मुज़फ्फरनगर  एवं मेरठ जिलों में शिक्षा विभाग के साथ कार्यशाला आयोजित कर विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों के साथ योजना बनाने के शुरुवात की। इस कार्य में सभी घटकों के साझे प्रयास की जरूरत है जिसके लिए ऑक्सफैम ने शिक्षा विभाग के साथ जिलों में कार्यरत सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत कर अन्य संस्थाओं को भी इस कार्य में जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। 

16 सितम्बर को प्रतापगढ़ में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री सुधीर सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों के साथ मिल कर संयुक्त कार्यशाला की। कार्यक्रम के दौरान श्री सुधीर नें यह बताया किशारदा- स्कूल हर दिन आयेंकार्यक्रम के तहत हम ये प्रयास कर रहें हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह पाये। इस कार्य के लिये सभी ब्लॉक के शिक्षा विभाग के लोगो के साथ एक पुख्ता रणनीति बनाई जा रही है। इस अभियान को दो चरणों में किया जाना है जिसके प्रथम चरण में 10 सितम्बर से बच्चों का चिन्न्हिकरण किया जा रहा है। दूसरे चरण में पुनः बच्चों का चिन्न्हिकरण दिसम्बर माह में किया जाएगा। बेसिक शिक्षा द्वारा सभी विद्यालयों में नोडल शिक्षकों को चयनित किया गया है जो इस कार्य को करेंगे। 

इस कार्यक्रम में विभाग, सामाजिक संस्थानों के साथ भी कार्य करेगा जिससे साझे प्रयास से बच्चे विद्यालय में नामांकित हों और उनका ठहराव भी सुनिश्चित किया जा सके। डी सी प्रक्षीक्षण श्री कृष्ण विश्व कर्मा ने बताया कि जिले में बच्चों के विशेष प्रशिक्षण के लिए विभाग द्वारा तीन मास्टर ट्रेनर भी तैयार हैं जो कि बच्चों विद्यालय के समय के पहले या बाद में विशेष प्रक्षीक्षण देने का कार्य करेंगे। साथ हीं जिले में तीन  एस.आर.जी.पी (state resource group person) भी हैं जो कि बच्चों के चिन्न्हिकरण की रणनीति में सभी का सहयोग करेंगे। कार्यक्रम के दौरान सभी ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी, एस.आर.जी.पी,  जिला समन्वयक, ऑक्सफैम के प्रतिनिधि, चाइल्ड लाइन के प्रतिनिधि एवं सामाजिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे।  ऑक्सफैम प्रतापगढ़ के दो चयनित ब्लॉक में आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिन्हित कर उन्हें नामांकित करेगा। 

इसी क्रम में दिनांक 22 सितम्बर को शारदा प्रोग्राम के तहत ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल में जोड़ने के लिये  मुज़फ्फरनगर में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री माया राम के साथ एक कार्यशाला आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान ऑक्सफैम इंडिया ने मुज़फ्फरनगर में अपने चयनित पंचायतों में इस कार्य में शिक्षा विभाग का सहयोग करने का वादा किया। बच्चों को वॉलंटियर के माध्यम से चिन्हित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान एक्शन ऐड, मेरठ सेवा समाज और अस्तित्व सामाजिक संस्थान तथा अन्य सहयोगी संस्था के सदस्य भी शामिल थे। अन्य संस्था के साथियों नें भी अपने क्षेत्र के पंचायतों में इस कार्य में सजयोग करने का वादा किया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी वॉलंटियर को सर्वे फोरम भरने की जानकारी भी दी। 

ऑक्सफैम इंडिया उत्तर प्रदेश के छः जिलों- रायबरेली, प्रतापगढ़, फ़तेहपुर, मेरठमुज़फ्फरनगर और सहारनपुर में शिक्षा विभाग एवं सामाजिक संस्थाओं के साथ मिल कर बच्चों को विद्यालय में वापिस लाने के लिये प्रयासरत है। इसके साथ स्कोर से साथ जुड़े शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संगठनों  के साथ मिल कर अन्य जिलों में भी इस मुहिम को आगे बढ़ायेगा।  

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