इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट: भारत में महिलाओं के लिए कम कमाई और कम रोज़गार पाने के लिए भेदभाव मुख्य कारण है

इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट: भारत में महिलाओं के लिए कम कमाई और कम रोज़गार पाने के लिए भेदभाव मुख्य कारण है

  • By Abhirr VP
  • 15 Sep, 2022

15 सितंबर 2022, नई दिल्ली: ऑक्सफैम इंडिया की नवीनतम 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' में ये पाया गया की भारत में महिलाओं को उनकी समान शैक्षणिक योग्यता और कार्य अनुभव के बावजूद श्रमिक बाजार में सामाजिक और नियोक्ताओं के पूर्वाग्रहों के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ता है । इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022  में उपयोग किये गए सांख्यिकीय मॉडल ने श्रम बाजार में महिलाओं को सामने करने वाले भेदभाव को नापा है। वेतनभोगी महिलाओं के लिए कम वेतन 67 प्रतिशत भेदभाव और 33 प्रतिशत शिक्षा और कार्य अनुभव की कमी के कारण है। 

 

ऑक्सफैम इंडिया भारत सरकार से सभी महिलाओं के लिए समान मजदूरी और काम के अधिकार और सुरक्षा के लिए प्रभावी उपायों को सक्रिय रूप से लागू करने का आह्वान करता है। भारत सरकार को कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना चाहिए जिसमें वेतन में वृद्धि, अपस्किलिंग, नौकरी में आरक्षण और मातृत्व के बाद काम पे वापस आने में आसानी शामिल है।  

 

ये निष्कर्ष भारत सरकार 2004-05 से 2019-20 तक के रोजगार और श्रम आंकड़ों पर आधारित हैं। ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट 61 वे राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के नंबर, 2018-19 और 2019-20 की  श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और अखिल भारतीय ऋण और निवेश सर्वेक्षण (एआईडीआईएस) पर आधारित है।   

 

ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा  कि “भारत में अब तक अभिवंचित समुदायों के साथ होने वाले भेदभाव और इसका उनके जीवन पर होने वाले प्रभाव को मापने के लिए अब तक सीमित प्रयास किए गए हैं। यहाँ तक कि भेदभाव को मापने के लिए सतत शोध के तरीकों के माध्यम से और विश्वसनीय आंकड़ों को एकत्र करने के कमतर प्रयास किए गए हैं। ऑक्सफैम इंडिया ने देश भर में नौकरियों, आय, स्वास्थ्य और कृषि ऋण तक पहुंच की असमानता और भेदभाव को समझने के लिए 2004 से 2020 तक सरकारी आंकड़ों का व्यापक विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में यह पाया गया है कि यदि कोई पुरुष और महिला समान स्तर पर शुरू करें तो, आर्थिक क्षेत्र में महिला के साथ भेदभाव किया जायेगा जहां कि वो नियमित / वेतनभोगी, अल्पकालिक और स्वरोजगार में पिछड़ जाएगी। रिपोर्ट में पाया गया है कि श्रम बाजार में असमानता केवल शिक्षा तक पहुँच की कमी या कार्य अनुभव के कारण हीं नहीं है बल्कि भेदभाव भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण है।“ 

 

ऑक्सफैम रिपोर्ट के रिपोर्ट के अनुसार देश में कम महिला श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) के पीछे भेदभाव एक प्रमुख कारण हैं। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, भारत में महिलाओं के लिए एलएफपीआर (शहरी और ग्रामीण)  2020-21 में केवल 25.1 प्रतिशत था। यह विश्व बैंक के नवीनतम अनुमानों के अनुसार ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका की तुलना में काफी कम है। 2021 में दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के लिए एलएफपीआर 46 प्रतिशत है। 

 

भारत में महिलाओं के लिए एलएफपीआर 2004-05 में 42.7 प्रतिशत से तेजी से घटकर 2021 में मात्र 25.1 प्रतिशत रह गया है, जो इसी अवधि के दौरान तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद कार्यबल से महिलाओं की वापसी को दर्शाता है। 2019-20 में, 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पुरुषों में से 60 प्रतिशत के पास नियमित वेतन और स्वरोजगार की नौकरी है, जबकि समान आयु वर्ग की केवल 19 प्रतिशत महिलाओं को नियमित और स्वरोजगार मिलता है। 

शहरी क्षेत्रों में नियमित और स्वरोजगार के मामले में पुरुषों और महिलाओं की आय में भी काफी अंतर है। स्वरोजगार में पुरुषों के लिए औसत कमाई INR 15,996 और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए केवल INR 6,626 है। पुरुषों की औसत कमाई महिलाओं की कमाई का लगभग 2.5 गुना है।  

'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' के लेखकों में से एक प्रोफेसर अमिताभ कुंडू ने बताया कि, "देश भर में उपेक्षित समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले भेदभाव को मापने के उचित प्रयास नहीं किए गए हैं। हमने विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच रोजगार, मजदूरी, स्वास्थ्य और कृषि ऋण तक पहुंच में अंतर परिणामों को समझने के लिए 'अपघटन (डिकम्पोजीसन)' नामक एक सांख्यिकीय पद्धति का उपयोग किया है। इससे हमें 2004-05 से 2019-20 तक हाशिए के समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले भेदभाव को मापने में मदद मिली है। रिपोर्ट के निष्कर्ष अद्वितीय हैं और इससे केंद्र और राज्य सरकारों के नीति निर्माताओं को कार्यक्रम आधारित  हस्तक्षेपों को डिजाइन करने में मदद मिलेगी जो भेदभाव से निपटने के लिए श्रम, पूंजी और बंदोबस्ती बाजारों में समावेशिता लाएंगे।“ 

 

महिलाओं के अलावा, रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि कैसे अन्य हाशिए के समुदायों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) के व्यक्तियों की औसत आय, जो नियमित रूप से कार्यरत हैं, सामान्य श्रेणी के व्यक्तियों के लिए INR 20,000 के मुकाबले INR 15,000 है। रिपोर्ट के अनुसार इसका मतलब है कि सामान्य वर्ग एससी या एसटी की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक कमा रहा है। स्व-नियोजित श्रमिकों की औसत कमाई, गैर-एससी या एसटी के लिए 16,000 रुपये और एससी या एसटी के लिए 11,000 रुपये है। 

 

ऑक्सफैम की 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' से पता चलता है कि COVID-19 महामारी ने उपेक्षित समुदायों के जीवन और आजीविका को तबाह कर दिया है और महामारी से उबरने के लिए तत्काल समान और समावेशी राहत उपायों का आह्वान किया है। नीचे रिपोर्ट से कुछ संक्षिप्त सिफारिशें दी गई हैं: 

  

  

·   सभी महिलाओं के लिए समान वेतन और काम के अधिकार के कार्यान्वयन के लिए कानूनों को सक्रिय रूप से लागू करें। 

  

·   कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने के लिए कार्य करना, जिसमें वेतन में वृद्धि, अपस्किलिंग/ दक्षता उन्नयन , नौकरी में आरक्षण और मातृत्व के बाद काम पर वापसी के आसान विकल्प शामिल हैं। 

  

·   श्रम बाजारों में महिलाओं की भागीदारी के इर्द-गिर्द सामाजिक और जाति/धर्म आधारित मानदंडों को सक्रिय रूप से चुनौती देने और बदलने के लिए कार्य करना। 

  

·   महिलाओं और पुरुषों के बीच घरेलू काम और बच्चों की देखभाल के कर्तव्यों का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करने और श्रम बाजार में महिलाओं की उच्च भागीदारी को सुगम बनाने में नागरिक समाज की भागीदारी को मजबूत करना। 

  

·   न्यूनतम मजदूरी के विपरीत "जीवित मजदूरी" को लागू करें, विशेष रूप से सभी अनौपचारिक श्रमिकों के लिए और जितना संभव हो संविदात्मक, अस्थायी और आकस्मिक श्रम को औपचारिक रूप दें। सामाजिक समूहों की परवाह किए बिना सभी किसानों के लिए प्राथमिकता ऋण और ऋण पहुंच प्रदान करें और पक्षपातपूर्ण उधार को दंडित करें। 

  

·   धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों के कल्याण के लिए के लिए प्रमुख पहलों को लागू करें। 

  

·   सुनिश्चित करें कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए जाति आधारित प्रतिनिधित्व और सकारात्मक कार्रवाई केंद्रित और सटीक कल्याण लक्ष्य के साथ जारी रहे। सार्वजनिक अस्पतालों में आंतरिक सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार और प्रोत्साहन के माध्यम से सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समूहों के लिए अस्पताल में भर्ती की सुविधा; निजी अस्पतालों में बीमा कवरेज और बिस्तरों के आरक्षण का विस्तार। 

  

विस्तृत रिपोर्ट यहाँ से डाउन-लोड करें- 

  https://www.oxfamindia.org/knowledgehub/workingpaper/india-discrimination-report-2022

 

For any query, please reach out to - abhirr@oxfamindia.org

About Oxfam India

Oxfam India is a movement of people working to end discrimination and create a free and just society. We work to ensure that Adivasis, Dalits, Muslims, and women and girls have safe violence-free lives with freedom to speak their minds, equal opportunities to realize their rights, and a discrimination-free future.


Related Stories

India Discrimination Report

12 Jan, 2021

Ahmedabad, Gujarat

Food For Two

Manjuben Suhasbhai Rathod is a migrant worker from Agra, Uttar Pradesh, living with her husband in a kachcha hut in Ahmedabad’s Akaldevnagar for the last 20 years.

Read More

India Discrimination Report

12 Jan, 2021

Ahmedabad, Gujarat

A Helping Hand

Oxfam India along with HCL Foundation distributed ration and hygiene kits to 1000 women migrant workers in Ahmedabad. Vilasben Hamirbhai Solanki is one of them.
Read More

India Discrimination Report

12 Jan, 2021

Ahmedabad, Gujarat

The First Ray of Hope

Oxfam India along with HCL Foundation distributed ration and hygiene kits to 1000 women migrant workers in Ahmedabad. Mehmudaben Mushabhai Patel was one of them.
Read More

Women Livelihood

28 Dec, 2020

Bihar

Where There Is A Will, There Is A Way

Manju Devi heads a farmers producer company. Her journey from a shy homemaker to the president of an FPC is remarkable.This is her story. In 2016, with the support of Oxfam Germany and Federal Ministry of Economic Cooperation and Development (BMZ), Oxfam India in collaboration with SEWA Bharat (a federation of women-led institutions providing economic and social support to women in the informal sector) started a 3-year joint project in two districts of Bihar — Munger and Bhagalpur. 
Read More

img Become an Oxfam Supporter, Sign Up Today One of the most trusted non-profit organisations in India